श्री नयनादेवी विधानसभा क्षेत्र ग्राम पंचायत टरवाड़ का गांव म्योठ के पांच परिवार आज भी सुविधा से वंचित, सड़क से करीब एक किलोमीटर तक पालकी में ले जाने पड़ते हैं मरीज, चटीरा माता के मंदिर तक सड़क निकल चुकी है,

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प्रदीप चंदेल श्री नैना देवी जी
श्री नयनादेवी विधानसभा क्षेत्र ग्राम पंचायत टरवाड़ का गांव म्योठ के पांच परिवार आज भी सुविधा से वंचित, सड़क से करीब एक किलोमीटर तक पालकी में ले जाने पड़ते हैं मरीज, चटीरा माता के मंदिर तक सड़क निकल चुकी है, लेकिन इससे आगे करीब एक किलोमीटर तक सड़क निकालने में पंचायत प्रतिनिधि भी नाकाम रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधि बजट न होने का रोना रोते हुए अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

हैरानी की बात है कि वोट के समय हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले प्रतिनिधि सड़क निकालने की बात करते हैं, लेकिन बाद में वादों से मुकर जाते हैं। आपदा प्रबंधन बोर्ड के राज्य उपाध्यक्ष रणधीर शर्मा डेढ लाख रुपये देने की बात कर रहे हैं, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि उनके पास कोई बजट नहीं आया है। सूत्रों की मानें तो सड़क न निकालने का मुख्य कारण राजनीतिक द्वेष माना जा रहा है क्योंकि पंचायत प्रतिनिधि कांग्रेस से संबंध रखते हैं और परिवार भाजपा से समर्थित है। ऐसे में सड़क राजनीति की दोधारी तलवार पर खड़ी है, लेकिन यहां पर सवाल है कि क्या विकास केवल राजनीतिक पार्टियों को देखकर की किया जा रहा है। परिवार के लोगों का उनके बेटे की दुर्घटना हुई है और उसे अस्पताल से लाने के लिए चरपाई का सहारा लेना पड़ा और चरपाई को उठाने के लिए आठ लोगों का प्रबंध करना पड़ा।

इसके साथ ही बहू की डिलीवरी होने पर भी यही समस्या सामने आई है। श्याम लाल का कहना है कि अगर वह दूसरी पार्टी से संबंध रखते हैं तो क्या उन्हें विकासात्मक कार्यों से वंचित रखा जाना उचित है। क्षेत्र के प्रतिनिधि ही जब भेदभाव करेंगे तो आम जनता का क्या होगा यह सवाल कोई छोटा नहीं सवाल नहीं है। इससे राजनीतिक द्वेष की बू आ रही है। कहा जा रहा है कि मात्र एक किलोमीटर सड़क को जानबूझकर रोका गया है।उनका कहना है कि जो पैदल रास्ता है उसकी हालत भी सही नहीं है।

दो लोगों को चलना मुश्किल हो गया है। पत्थरों पर फिसलने का डर बना रहता है। उन्होंने उपायुक्त से गुहार लगाई है कि सड़क सुविधा उपलब्ध करवाई जाए ताकि उन्हें दिक्कतों का सामना न करना पड़े। वहीं राजकुमारी प्रधान का कहना है कि जो परिवार हैं उनके घर पंजाब वार्डर पर हैं। ऐसे में वह मशीन लगाकर सड़क नहीं निकाल सकते हैं, लेकिन मनरेगा के तहत सड़क निकाली जा सकती है और इसकी कोशिश की जा रही है।

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Author: nstar india

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