शिमला में प्री मॉनसून का कहर, दो परिवार हुए बेघर, गाड़ियां मलबे में दबी, दुकानदारों की रोजी रोटी पर संकट

शिमला में प्री मॉनसून का कहर, दो परिवार हुए बेघर, गाड़ियां मलबे में दबी, दुकानदारों की रोजी रोटी पर संकट

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शिमला में प्री मॉनसून का कहर, दो परिवार हुए बेघर, गाड़ियां मलबे में दबी, दुकानदारों की रोजी रोटी पर संकट

राजधानी शिमला में हुई पहली बारिश ने ही नगर निगम द्वारा किए कामों को आइना दिखा दिया है। शहर में घरों, गाड़ियों, सड़कों, पर हर जगह बारिश ने तबाही मचाई। कृष्णानगर वार्ड में जहां दो मकान ढह गए, वहीं कुसुंपटी और छोटा शिमला वार्ड में डंगे गिरे, रामबाजार में सड़क पर मलबा गिरने से रोड ब्लॉक, फल मंडी ढली में मलबा आया, लोकल बस स्टैंड में मलबा आने से 3 दुकानें इसकी चपेट में आई,स्टॉल लगाकर सामान बेचने वाले का स्टॉल पानी में बह गया। संजौली की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मलबे ने रास्ता ब्लॉक कर दिया, भट्टाकुफर वार्ड में आधी रात को मलबा घरों में घुस गया, कई वार्डों में रोड साइड खड़ी गाड़ियों पर पेड़ और पत्थर गिरे जिससे वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए। मानसून से पहले हुई भारी बारिश ने शिमला में बाढ़ जैसे हालत पैदा कर दिए हैं। नतीजा आधी रात को लोग घरों से बाहर निकलकर जान बचाने को मजबूर हुए।इस तबाही के लिए नगर निगम जिम्मेदार:


शहर में है संपति के नुकसान के लिए जनता का एमसी प्रशासन पर जमकर गुस्सा फूट रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कई महीनों से बार- बार नालों को साफ करने की मांग की जा रही थी, लेकिन नगर निगम आराम से सोता रहा। एक हफ्ते पहले नालों की सफाई का काम शुरू किया जो मई से होना चाहिए था। नई एमसी बनने पर सारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का दावा किया जा रहा था। पहली बारिश ने साफ दिखा दिया कि काम सिर्फ कागजों में शत प्रतिशत हो रहा है। प्री मानसून पर निगम प्रशासन के अधिकारियों की नींद खुली और आनन- फानन में सफाई करने जुटे। हर साल यही परेशानी देखने को मिलती है जिसका नगर निगम को स्थाई इंतजाम करना चाहिए।

निगम को अब खल रही लेबर स्टाफ की कमी:
भारी नुकसान के बाद निगम प्रशासन यह तर्क दे रहा है कि उनके पास लेबर स्टाफ की कमी है। जब मालूम है की जुलाई में बरसात आना तय है तो एकस्ट्रा लेबर क्यों नहीं हायर की गई।

पार्षद बोलें, लापरवाह निगम पर हो कार्रवाई:
भट्टाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर का कहना है कि घर में मलबा घुसने पर आधी रात को बच्चों को घरों से बाहर निकाला गया। नगर निगम को काफी पहले से इस जगह सीढियां लगाने की मांग की गई थी ताकि घरों को कोई क्षति न हो। निगम अधिकारी आश्वासन देकर काम करना भूल गए।

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नाला बनाने की मांग नहीं हुई पूरी:
नाभा वार्ड की पार्षद सिम्मी नंदा का कहना है कि मलबा गिरने से रोड ब्लॉक हो गया जिसे जेसीबी द्वारा क्लियर किया जा रहा है। 2022 से वार्ड में नाले बनाने के लिए फाइल तैयार की गई है जिसे बजट की कमी बताकर नजर अंदाज किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरा रोड ही मलबे से भर गया।

नगर निगम मेयर सुरेंद्र चौहान का कहना है कि पहली बारिश में अक्सर ज्यादा नुकसान होता है। काफी जगहों से नुकसान को लेकर फोन आ रहे हैं। जो रास्ते टूटे हैं उन्हें ठीक करने के लिए निगम की टीम काम कर रही है। मकान गिरने पर पीड़ित परिवार को 15- 15 हजार की राहत दी गई है।

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Author: nstar india

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