24 दिन बाद भी सरकार और प्रशासन की ओर से तंबू लगाने के लिए उपलब्ध नहीं करवाई गई जमीन

24 दिन बाद भी सरकार और प्रशासन की ओर से तंबू लगाने के लिए उपलब्ध नहीं करवाई गई जमीन

Read Time:7 Minute, 29 Second

24 दिन बाद भी सरकार और प्रशासन की ओर से तंबू लगाने के लिए उपलब्ध नहीं करवाई गई जमीन

NALAGARH ,(SIMRAN RANA)

रामशहर के मझेहड़ गांव में प्राकृतिक आपदा के कारण 13 परिवार हुए थे बेघर
भूस्खलन की वजह से टूट गए थे सभी परिवारों के घर
24 दिन बाद भी सरकार और प्रशासन की ओर से तंबू लगाने के लिए उपलब्ध नहीं करवाई गई जमीन
तंबू लगाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है पीड़ित परिवार
पीड़ित बुजुर्ग महिला ने कहा जिस दिन भूस्खलन की वजह से टूटे थे मकान उसी दिन अगर आ जाती मौत तो नहीं देखनी पड़ती नर्क से बदतर जिंदगी
उपमंडल प्रशासन लोगों को जमीन उपलब्ध करवाने में रहा नाकाम

उपमंडल नालागढ़ के तहत रामशहर के मझेहड़ गांव के लोगों पर पहले प्राकृतिक आपदा के कारण भूस्खलन हुआ और उसके बाद गांव के 13 परिवारों के मकान टूट गए और सभी 13 परिवार बेघर होकर सड़कों पर आ गए। प्रकृति आपदा 11 अगस्त को हुई थी और उसी दिन से यह सभी 13 परिवारों के सदस्य सड़कों पर आ चुके हैं और कोई अपने रिश्तेदारों के यहां दिन गुजर रहा है और कोई अंबेडकर भवन में अपने बच्चों के साथ दिन बीतने को मजबूर है।

आपको बता दें कि सभी परिवारों के सदस्य एकत्रित होकर तहसीलदार रामशहर और पंचायत सचिव रामशहर के पास एक शिकायत लेकर गए थे और उनकी ओर से कहा गया था कि उन्हें तंबू लगाने के लिए कहीं पर भी जगह उपलब्ध करवाई जाए लेकिन 24 दिन बीत जाने के बाद भी आज दिन तक ना तो प्रशासन की ओर से उन्हें तंबू लगाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाई गई और ना ही पंचायत प्रधान एवं स्थानीय प्रशासन की ओर से कहीं पर रहने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

आपको बता दें कि यह पीड़ित परिवार पिछले 24 दिनों से कभी तहसीलदार के यहां तो कभी पंचायत प्रधान के यहां दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है लेकिन कहीं पर भी इन्हें तंबू लगाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करवाई गई है। और ना ही उनके लिए कोई कैंम्प, मंदिर, मस्जिद या फिर किसी सत्संग भवन में रहने की कोई व्यवस्था उपलब्ध करवाई गई है अब इन परिवारों के लोगों में प्रशासन और सरकार के खिलाफ खास रोष देखा जा रहा है पीड़ित परिवार के सदस्यों का कहना है कि अगर उनके लिए जल्द तंबू लगाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करवाई गई तो वह आत्मदाह करने को मजबूर होंगे जिसकी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और सरकार की होगी अब देखना यही होगा कि कब इन पीड़ित परिवारों को स्थानीय प्रशासन की ओर से कहीं रहने की व्यवस्था करवाई जाती है और कब पीड़ित परिवारों के सिर पर मंडरा रहे मौत के खतरे के बादलों से छुटकारा मिल पाता है।

इस बारे में जब हमने पीड़ित परिवारों के सदस्यों से बातचीत की तो उनका कहना है कि वह पिछले 24 दिनों से दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है और कभी तहसीलदार के यहां तो कभी पंचायत प्रधान के यहां चक्कर काट रहे हैं लेकिन ना तो तहसीलदार की ओर से उन्हें कोई रहने की व्यवस्था करवाई गई और ना ही पंचायत की ओर से उन्हें कोई व्यवस्था करवाई गई है पीड़ित परिवारों का कहना है कि सरकार और प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं कि जहां भी प्राकृतिक आपदा आई है वहां के लोगों को रहने और खाने-पीने की सभी प्रकार की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है लेकिन ना तो यहां सरकार की ओर से कोई ध्यान दिया गया है और ना ही प्रशासन की ओर से उन्हें कोई मदद दी गई है पीड़ित परिवारों ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देकर कहा है कि अगर जल्द ही उनके रहने को और खाने पीने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं करवाई गई तो वह आत्मदाह करने को भी मजबूर होंगे जिसकी जिम्मेवारी स्थानीय प्रशासन और सरकार की होगी।

इस बारे में जब हमने एक बुजुर्ग महिला से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि आपदा के कारण भूस्खलन की वजह से गांव के सभी मकान टूट गए और सभी पीड़ित परिवार के लोग बेघर हो चुके हैं और अब आपदा आई को भी एक महीना होने को है लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से उनके लिए ना तो रहने खाने की व्यवस्था करवाई गई है और ना ही किसी सुरक्षित जगह पर तंबू लगाने की अभी तक जमीन की व्यवस्था करवाई गई है पीड़ित बुजुर्ग महिला का कहना है कि जिस दिन आपदा आई और उनके मकान भूस्खलन की वजह से टूटे यदि उसी दिन उन्हें भी मकान के साथ मौत आ जाती तो आज वह नर्क से बदतर जिंदगी उन्हें नहीं देखनी पड़ती। पीड़ित बुजुर्ग महिला का कहना है कि यहां पर एमपी एवं नेता लोग आते हैं और फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं और उनकी सुनने वाला कोई भी नहीं। मात्र फोटो खिंचवाकरअपनी अपनी राजनीति की रोटियां सेकने में सभी लोग लगे हुए हैं।

इस बारे में जब हमने राम शहर के नायब तहसीलदार हरि राम से बातचीत की दोनों का कहना है कि पीड़ित परिवारों की ओर से उनके पास शिकायत दी गई है और जिसको लेकर उन्होंने जमीन उपलब्ध करवाने के लिए हायर अथॉरिटी को शिकायत भेजी गई है जैसे ही उच्च अधिकारियों की ओर से अनुमति मिलती है तो इन पीड़ित परिवारों को अस्थाई तौर पर तंबू एवं अन्य सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तंबू लगाने की परमिशन बाहर नहीं दे सकते क्योंकि इसकी अथॉरिटी उनके पास नहीं है सरकारी जमीन में तंबू लगाने की परमिशन उच्च अधिकारी ही दे सकते हैं और जैसे ही उनके पास अनुमति आती है वह इन पीड़ित परिवारों को तम्बू लगाने के लिए अनुमति दे दी जाएगी।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
nstar india
Author: nstar india

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *