खतरे में जगात खाना पुल: सरसा नदी में 50-50 फुट गहरे गड्ढे कर जंगलात की भूमि को छलनी कर रहे खनन माफिया
- बरसात के कारण पिलर्स के साथ लगी जमीन का हुआ भारी कटान, कभी भी गिर सकता है पुल
- स्थानीय लोगों का आरोप- बार-बार शिकायत के बावजूद कुंभकर्णी नींद सोया है प्रशासन
नालागढ़ (विशेष प्रतिनिधि):
नालागढ़ के तहत जगात खाना पुल के नजदीक सरसा नदी में नियमों को ताक पर रखकर सरेआम किए जा रहे अवैध खनन से इस मुख्य पुल के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडराने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग (जंगलात) की भूमि पर खनन माफिया बिना किसी रोक-टोक और डर के दिन-रात अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं। माफियाओं ने नदी के सीने को चीरकर जगह-जगह 50-50 फुट गहरे जानलेवा गड्ढे कर दिए हैं, जिससे पूरी नदी का स्वरूप बिगड़ चुका है।
पिलर्स के नीचे से खिसक रही मिट्टी, हादसे को न्यौता
स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस अंधाधुंध खनन और हाल ही में हुई बरसात के कारण सरसा नदी पर बनाए गए पुल के पिलर्स (खंभों) के साथ लगती ज़मीन का भारी कटान शुरू हो गया है। पिलर्स के नीचे से मिट्टी और सुरक्षा दीवारें लगातार धंस रही हैं। अगर जल्द ही इस अवैध खनन पर लगाम नहीं लगाई गई, तो जगात खाना पुल कभी भी ज़मींदोज़ हो सकता है, जिससे इलाके का संपर्क पूरी तरह कट जाएगा और कोई बड़ी मानवीय त्रासदी हो सकती है।
शिकायतों पर नहीं होती कोई कार्रवाई, माफियाओं के हौसले बुलंद
ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि इस अवैध कारोबार की जानकारी और पुल को हो रहे नुकसान के बारे में कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन को लिखित व मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं। लेकिन हर बार शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी और ढुलमुल रवैये के कारण ही खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और वे बेखौफ होकर प्राकृतिक संपदा और सरकारी संपत्ति को लूट रहे हैं।
सरकार और उच्चाधिकारियों से गुहार
इलाके के लोगों ने हिमाचल सरकार और जिला प्रशासन से पुरज़ोर मांग की है कि इस संवेदनशील मामले पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। सरसा नदी में हो रहे इस अवैध खनन पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और दोषी माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि इस करोड़ों की लागत से बने जगात खाना पुल को बचाया जा सके।








